प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता मिशन

By Vikaspedia on 31 May 2017 | read
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Government has started Digital India program with an ambitious hypothesis to transform India into a digital empowering society and knowledge economy . The program involves the idea of connecting citizens with various e-governance initiatives, including decision making to strengthen public participation and increase administration accountability. The full potential of the Digital India program can be realized, if each citizen, with the ability to access digital services / technologies, regardless of location and social background, its ability to reach and benefit. Universal digital literacy across the country including rural India is an essential element for the success of these initiatives.

The government has approved two schemes for providing digital literacy, namely, National Digital Literacy Mission (NDLM) and Digital Literacy Campaign (DISS) which is a special purpose vehicle (CSC-SPV), CSC e-Governance Services India Limited (A public limited company established under the Companies Act, 1956). Under these two schemes, the cumulative target of providing literacy to the duly certified beneficiaries of 52.5 lakhs was achieved long before the proposed deadline of December 2018 in December 2016.

Objective of the program

The main objective of the program is to create six crore people in the entire states / union territories, rural areas, digital literate, covering almost 40% of rural households by covering a member of each eligible family.

The purpose of this scheme is to provide citizens with computer access to digital areas or digital access devices (like tablets, smart phones, etc.), sending and receiving e-mails, browsing the Internet, using government services, searching for information, digital payment Launching, etc. And so actively in the process of information technology and related applications, especially digital payments nation building Enables to participate Thus, the purpose of this scheme is to connect digital divisions, especially targeting the rural population, in which the Scheduled Caste (SC) / Scheduled Tribes (ST), below poverty line (BPL), women, disabled and minorities Segments containing margins include.

Duration of the plan

The duration of this scheme is till March 31, 2019.

  • Eligible family

A family is defined as a unit, which includes the head of the family, husband or wife, children and parents. In all the households where no family member is digital literate, they will be considered as eligible houses under this scheme.

entry criteria

  1. Interesting digital literate should be
  2. Only one person from each house will be considered for training.
  3. Age range: 14 - 60 years.

Priority

  • Non-smartphone users, Antodaya home, College Drop-out, Adult literacy mission participants
  • For students of Class 9th to 12th Digital Illiterate students whose computer / ICT training facility is not available in schools.
  • Priority will be given to SC (SC), ST (ST), below poverty line (BPL), women, disabled and minorities.
  • हितग्राहियों की पहचान सीएससी-एसपीवी द्वारा डीईजीएस, ग्राम पंचायतों, और ब्लॉक विकास अधिकारियों के साथ सक्रिय सहयोग से पूरी की जाएगी ।

इस तरह के हितग्राहियों की सूची पोर्टल में उपलब्ध कराई जाएगी ।

यह योजना देश के केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू है। पूरे देश में न्यायसंगत भौगोलिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, 2.50 लाख ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक के लिए निर्धारित और निगरानी रखने वाले लक्ष्यों के साथ एक ग्राम पंचायत केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। औसतन हर ग्राम पंचायत के अनुसार 200-300 लाभार्थियों का लक्ष्य माना जाता है। वास्तविक लक्ष्य जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी (डीजीएस) द्वारा तय किया जाएगा, जिले का आकार, आबादी, स्थानीय आवश्यकताओं, आदि को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल गावों को पूरी डिजिटल साक्षरता प्रदान करने के लिए प्रयास किए जाएंगे ।

डिजिटल साक्षरता व्यक्तियों और समुदायों की क्षमता के अनुसार समझ और जीवन परिस्थितियों में डिजीटल तकनीक का सार्थक कार्यों के लिए उपयोग करना है। डिजिटली साक्षर व्यक्ति कंप्यूटर/ डिजिटल एक्सेस डिवाइस (जैसे टेबलेट, स्मार्ट फोन, आदि) को संचालित कर सकेंगे, ईमेल भेजने के साथ प्राप्त कर सकते हैं, इंटरनेट ब्राउज़ कर सकते हैं, सरकारी सेवाएं एक्सेस कर सकते हैं, जानकारी खोज सकते हैं, नकद के बिना लेनदेन आदि कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भागीदीरी करने के लिए आईटी का उपयोग कर सकते हैं।एमजीदिशा विश्व के सबसे बड़े डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों में से एक होने वाला है। इस योजना के अंतर्गत, वित्तीय वर्ष-2016-17 में 25 लाख वित्तीय वर्ष 2017-18 में 275 लाख; 2018-19 वित्तीय वर्ष में 300 लाख उम्मीदवार प्रशिक्षित किए जाएंगे। भौगोलिक रुप से सभी तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, 250,000 ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक 200-300 उम्मीदवारों की संख्या के साथ पंजीकरण होंगी।

राज्यवार लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, यहां क्लिक करें।

व्यापक सामग्री की रूपरेखा

मॉड्‌यूल का नाम

  • डिजिटल उपकरणों का परिचय
  • ऑपरेटिंग डिजिटल डिवाइस
  • इंटरनेट का परिचय
  • इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए संचार
  • इंटरनेट के आवेदन
  • (नागरिक-केन्द्रित सेवाएं शामिल होगीं; नकद रहित लेनदेन करने के लिए डिजिटल वित्तीय उपकरणों का उपयोग होगा)

कुल अवधि : 20 घण्टे

प्रशिक्षण शुल्क

300/-प्रति उम्मीदवार सीएससी-एसपीवी के माध्यम से उनके द्वारा प्रशिक्षित  उम्मीदवारों के सफल प्रमाणीकरण पर सीधे संबंधित प्रशिक्षण भागीदारों / केन्द्रों को सीधे देय हैं ।

उपरोक्त एजेंसियों को भुगतान जारी करना डीईजीएस से एक फीडबैक /इनपुट के साथ प्राप्त परिणामों  पर आकस्मिक होगा ।  इनमें ई-मेल एकाउंट बनाने, ई-मेल भेजने, डिजिटल लॉकर खोलने, ई-रेल टिकट बुकिंग, बिजली/पानी के बिल का ई-भुगतान, पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन करना, डिजिटल भुगतान करना या ई-केवाईसी को सक्षम करना शामिल हो सकता है । प्रशिक्षु  द्वारा अनुपालन, जीसीसी सेवाएं जैसे कि पैनर कार्ड, मोबाइल रिचार्ज, एईपीएस /यूएसएसडी / यूपीआई / ई-वॉलेट इत्यादि का उपयोग करने के लिए उपयोग करना ।

70/-प्रति उम्मीदवार परीक्षा शुल्क है। उम्मीदवारों के मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए विधिवत्‌ पंजीकृत प्रमाणित एजेंसियों को यह शुल्क प्रत्यक्ष रूप से देय होगा ।

राज्यों / संघ शासित प्रदेशों  के लिए वित्तीय सहायता

राज्य क्रियान्वयन एजेंसियां, ओवरहेड की लागत को पूरा करने और योजना की निगरानी हेतु सीएससी-एसपीवी द्वारा 2/-प्रति उम्मीदवार वित्तीय सहायता के पात्र होंगे ।

Impact Assessment Study: Impact Assessment Study (s) will be organized by an independent third party. To complete the study, the Ministry of Electronics and Information Technology will employ appropriate institutions / organizations.

Details of all the six crore beneficiaries under this scheme are for skill development and entrepreneurship, State Skill Development Mission, Sector Skills Council for proper convergence and with other skill development schemes to strengthen forwarding relations in the country. Skilling / Employment echo systems will be shared

Source: PMGDisha

PMG DIRECTION GUIDELINES

 

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