केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड की योजनायें

By Vikaspedia on 09 Jun 2017

 

केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड का मुख्य  उद्‌देश्य है समाज में महिलाओं के कल्याण, विकास और सशक्तिकरण के लिए गैर-सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक संगठनों के साथ रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करना तथा इस कार्य के लिए ऐसे अधिक से अधिक संगठनों को बढ़ावा देना। इसी उद्‌देश्य की पूर्ति के लिए 1953 में बोर्ड की स्थापना की गई थी। केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत गैर-सरकारी/स्वैच्छिक संगठनों को सहायता उपलब्ध कराता है ताकि वे महिलाओं में शिक्षा, प्रशिक्षण, आश्रय, परामर्श सेवा तथा सहायक सेवाएं उपलब्ध कराकर समाज में उनकी स्थिति को सुदृढ़ बना सकें और उन्हें सशक्त कर सकें।

 

राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर अत्यधिक प्रगतिशील इकाई के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयास करना तथा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, क्षमता-निर्माण और पूर्ण सशक्तिकरण के लिए सुस्पष्ट और सर्वोत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करना। महिलाओं एवं बालिकाओं के कानूनी तथा मानवाधिकारों के संबंध में लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा इन्हें प्रभावित करने वाली सामाजिक बुराइयों के विरुद्‌ध अभियान चलाना। केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड की कल्याणकारी योजनायें इस प्रकार हैं-

 

इस योजना के अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए अल्पावास गृह चलाने हेतु स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान प्रदान किया जाता है। इसका उद्‌देश्य उन महिलाओं एवं बालिकाओं को संरक्षण एवं पुनर्वास सेवा प्रदान करना है, जो पारिवारिक कलह के कारण सामाजिक-आर्थिक समस्याओं, भावनात्मक अशांति, मानसिक समस्याओं, सामाजिक उत्पीड़न, शोषण का शिकार हों, या जिन्हें वेश्यावृत्ति के लिए विवश किया गया हो। इस योजना के अंतर्गत जरूरतमंद महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए छह महीने से तीन वर्ष तक अस्थायी आश्रय और अन्य सेवाएं/सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जैसे -

 

(1) मामले की पड़ताल एवं परामर्श सेवाएं,

(2) स्वास्थ्य रक्षा एवं मनोचिकित्सा  उपचार

(3) व्यवसाय संबंधी सहायता, हुनर विकास हेतु प्रशिक्षण तथा पुनर्वास सेवाएं एवं

(4) शिक्षा, व्यावसायिक एवं मनोरंजन संबंधी गतिविधियां।

 

माताओं के साथ आने वाले बच्चे या गृह में जन्में बच्चे 7 साल की आयु तक वहां रह सकते हैं। इसके बाद उन्हें बाल-संस्थाओं में भेज दिया जाता है या लालन-पालन की सेवाएं प्रदान की जाती हैं।गृह में एक समय पर औसतन 30 आवासी हो सकते हैं। इसमें कम से कम 20 और अधिक से अधिक 40 आवासियों के लिए सुविधाएं हों। योजना के अनुसार एक अल्पावास गृह के लिए आवर्ती मद में रख-रखाव, कर्मचारियों के वेतन, भवन के किराए, आकस्मिकताएं, चिकित्सा, पुनर्वास हेतु 5.00 लाख और अधिक रुपये तथा अनावर्ती मद में कार्यालय फर्नीचर, बिस्तर हुनर विकास के उपस्करों के लिए 50,000/- रुपये मंजूर किए जाते हैं। 'ए', 'बी' और 'सी' श्रेणी के शहरों में अल्पावास गृहों के लिए किराए की मद में दी जाने वाली राशि अलग-अलग है।

 

अल्पावास गृह के लिए अनुदान मंजूर करने की पात्रता निम्नलिखित है :-

 

(क)   स्वैच्छिक संगठन पूरे समय के लिए महिलाओं/सामुदायिक गतिविधियों से संबंध  हो।

(ख)   अल्पावास गृह जिला/खंड मुखयालय या ऐसे शहर में स्थित होना चाहिए, जिसकी आबादी अंतिम जनगणना के अनुसार 50,000 से कम न हो।

 

आवेदन जमा करने की प्रक्रिया

 

जुलाई 22, 1999 से बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी (सी.डी.पी.ओ.) को महिला एवं बाल विकास विभाग की सभी योजनाओं के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। स्वैच्छिक संगठन निर्धारित प्रपत्र के भाग 'क' और 'ख' में अपने आवेदन तीन प्रतियों में बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी को भेजें। यदि किसी परियोजना-क्षेत्र में बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी नहीं है तो आवेदन महिला एवं बाल विकास अधिकारी या जिले के समाज कल्याण अधिकारी को भेजा जाए।

 

बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी/महिला एवं बाल विकास अधिकारी/समाज कल्याण अधिकारी मंजूरी से पहले मूल्यांकन करेंगे और प्रस्ताव के साथ अपनी रिपोर्ट भाग 'ग' में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजेंगे। आवेदन एवं मंजूरी-पूर्व मूल्यांकन की रिपोर्ट की दूसरी प्रति राज्य सरकार को भेजी जाएगी जो तीन महीने के भीतर निर्धारित पपत्र में अपनी सिफारिशें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजेगी। यदि तीन महीने में सिफारिशें प्राप्त नहीं होती हैं तो यह समझा जाएगा कि राज्य सरकार प्रस्ताव का समर्थन करती है। आवेदन एवं निरीक्षण रिपोर्ट की तीसरी प्रति रिकार्ड हेतु निरीक्षण अधिकारी के पास रहेगी। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्‌वारा लिया जाएगा। इसकी सूचना स्वैच्छिक संगठनों को भेज दी जाएगी।

 

गैर-सरकारी संगठन/स्वैच्छिक संगठन द्‌वारा प्रस्तुत पिछले लेखा-विवरण के निपटान तथा बोर्ड के प्राधिकृत अधिकारी की संतोषजनक कार्य-निष्पादन रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड द्‌वारा जारी अनुदान बंटित किया जाएगा।

 

भूमिका

महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों तथा पारिवारिक आय में योगदान करने की आवश्यकता में वृद्धि के कारण अधिकाधिक महिलाएं रोज़गार के क्षेत्र में आ रही हैं। संयुक्त परिवारों के टूटने तथा एकल परिवारों की संख्या में वृद्धि के कारण महिलाओं को कामकाज पर जाने के समय अपने छोटे बच्चों की गुणवत्तापूर्वक देखभाल रूपी सहायता की आवश्यकता होती है। शिशुगृह एवं दिवस देखभाल सेवाओं की आवश्यकता केवल कामकाजी माताओं को ही नहीं बल्कि निर्धन परिवारों की उन महिलाओं को भी होती है, जिन्हें अपने घर-बाहर के कार्य निपटाने के लिए बाल-देखभाल के कार्य से राहत चाहिए।

 

योजना की रूपरेखा

 

राजीव गांधी राष्ट्रीय शिशुगृह स्कीम को वर्ष 2006 में नया रूप दिया गया।  इस स्कीम के अंतर्गत छह वर्ष तक के 25 बच्चों के लिए प्रातः9.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक आठ घंटे शिशुगृह चलाने एवं उन्हें सुलाने, स्वास्थ्य-देखभाल, पूरक पोषण, टीकाकरण आदि जैसी सेवाएं प्रदान करने के लिए स्वैच्छिक संगठनों  को सहायता प्रदान की जाएगी। इस स्कीम की पद्धति इस प्रकार है -

आवर्ती अनुदान

क्र.स.

अनुदान हेतु अनुमेय आवर्ती अनुदान

व्यय की अधिकतम सीमा

अनुदान

1.

प्रत्येक शिशुगृह के कार्यकर्त्ताओं को मानदेय (कार्यकर्त्ता)

रु.2000 प्रति माह

रु.2000 (100%)

2.

प्रति शिशुगृह पूरक पोषण (26 दिन के लिए रु.2.08 प्रति बालक/बालिका की दर से 25 बच्चों के लिए)

रु.1352 प्रति माह

रु.1217 (99%)

3.

आपात दवाइयां एवं आकस्मिक व्यय (प्रति शिशुगृह)

रु.350 प्रति माह

रु.315 (90%)

अनावर्ती अनुदान

क्र.स.

अनुमेय अनुदान

व्यय की अधिकतम सीमा

अनुदान

1.

पांच वर्ष के लिए अनावर्ती अनुदान

रु.10,000 तथा तत्पश्चात्‌ पांच-पांच वर्ष के अंतराल पर शत-प्रतिशत आधार पर उपभोज्य भंडार के प्रतिस्थापन के लिए रु.5000

रु.10,000 (100% प्रत्येक नए शिशुगृह  को आरंभ में एक बार) रु.3000 (100% पांच-पांच वर्ष के अंतराल पर)

 

आवेदन भेजने की प्रक्रिया

 

इच्छुक स्वैच्छिक संगठन/गैर-सरकारी संगठन ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं तथा रु.100 के शुल्क के साथ फार्म का प्रिंट-आउट राज्य बोर्ड में भेज सकते हैं।

 

अवसंरचना और सेवाएं

शिशुगृह में प्रत्येक बच्चे के लिए कम-से-कम 6-8 वर्ग फुट स्थान होना चाहिए ताकि, यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे बिना किसी कठिनाई के खेलकूद सकें तथा आराम व शिक्षण के कार्यकलाप कर सकें। शिशुगृह में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था उपलब्ध होने पर पंखा लगाया जाना चाहिए। शिशुगृह में छोटे बच्चों की आवश्यकतानुसार स्वच्छ शौचालय एवं साफ-सफाई की सुविधा होनी चाहिए। शिशुगृह के बाहर भी खेलकूद हेतु पर्याप्त और सुरक्षित स्थान होना चाहिए। शिशुगृह में बच्चों को सुलाने के लिए गद्‌दे, पालने, चारपाइयां, तकिए तथा आधारभूत अवसंरचना उपलब्ध होनी चाहिए। शाला-पूर्व शिक्षा प्राप्ति की आयु के बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खेल-कूद, अध्यापन एवं शिक्षण की आवश्यक सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। प्रत्येक शिशुगृह में उपस्थिति रजिस्टर बनाया एवं भलीभांति भरा जाना चाहिए। यह रजिस्टर शिशुगृह के कार्य समय के दौरान किसी भी समय निरीक्षण हेतु उपलब्ध होना चाहिए।

 

भोजन एवं अन्य आवश्यकताएं

 

•  शिशुगृह में आधारभूत प्रथमोपचार (फसर्ट एड) किट सर्वथा उपलब्ध रहनी चाहिए, जिसमें बच्चों की सामान्य बीमारियों की औषधियां होनी चाहिए। भोजन पकाने की पर्याप्त सुविधाएं, बर्तन तथा बच्चों को भोजन खिलाने हेतु पर्याप्त बर्तन उपलब्ध होने चाहिए और इन्हें प्रयोग के पूर्व एवं उपरांत नियमित रूप से धोया एवं साफ किया जाना चाहिए।

•  शिशुगृह में नियमित एवं सुरक्षित पेयजल स्रोत होना चाहिए। यथासंभव पेयजल का क्लोरीकरण किया जाना चाहिए। पेयजल को उबाला जाना चाहिए।

बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पर्याप्त रूप से पौष्टिक होना चाहिए। बच्चों को प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार का भोजन दिया जाना चाहिए।

 

शिशुगृह कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण

 

•  शिशुगृह कार्यकर्त्ता/कार्यकर्त्री एवं सहायक/सहायिका शिशुगृह में कार्य आरंभ करने के पश्चात्‌ अनिवार्य रूप से अल्पकालिक प्रशिक्षण प्रापत करेगा/करेगी। यह प्रशिक्षण राज्य बोर्ड द्वारा चुने हुए एवं मान्यता-प्राप्त प्रशिक्षण-संस्थाओं के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। राज्य बोर्ड द्वारा आयोजित प्रशिक्षण के बिना कोई शिशुगृह प्रारंभ नहीं होगा। अपने-अपने राज्यों में समय पर प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए राज्य बोर्ड के सचिव जिम्मेदार होंगे।

• प्रशिक्षण में बाल देखभाल, स्वास्थ्य-प्रथमोपचार (फर्स्ट एड), कार्डियो पल्मनरी रिससिटेशन, आपातकाल, साफ-सफाई रखने जैसे क्षेत्रों पर बल दिया जाएगा।

•  3-6 वर्ष की आयु के बच्चों को स्कूल-पूर्व शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इसका आधार प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा दिशा-निर्देश होंगे। गैर-सरकारी संगठन/स्वैच्छिक संगठन द्वारा समुचित उपस्कर और शिक्षण-सामग्री प्रदान की जाएगी।

•  उनमें बच्चों के चहुंमुखी विकास को बढ़ावा देने वाले विभिन्न कार्यकलाप आयोजित करने के कौशल विकसित करना।

•   शिशुगृह केंद्र और उसके आस-पास साफ-सफाई रखना।

•   समुदाय में बच्चों की बेहतर तरीके से देखभाल के लिए जागरूकता लाना।

•   सभी लाभार्थियों के रिकॉर्ड और रजिस्टर रखना।

डॉक्टर/स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता का साप्ताहिक दौरा और बच्चों को समय पर प्राथमिक उपचार की सुविधा सुनिश्चित करना। इस्तेमाल की हुई/समयावधि समाप्त हो चुकी दवाइयां या अन्य प्रतिबंधित सामान होने पर तत्काल अनुदान रद्‌द कर दिया जाएगा तथा संगठन को काली सूची में डाल दिया जाएगा और भविष्य में उसे सरकारी अनुदान देने पर रोक लगा दी जाएगी।

 

लेखा-विवरण का निपटान

गैर-सरकारी/स्वैच्छिक संगठन द्वारा वार्षिक लेखा-विवरण प्रस्तुत किया जाएंगे तथा वित्त वर्ष में ही उनका निपटान किया जाएगा। लेखा-विवरण के निपटान और संतोषजनक कार्य-निष्पादन के आधार पर ही जारी अनुदान दिया जाएगा।

 

भूमिका

यद्यपि महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड की अनेक योजनाएं और कार्यक्रम हैं तथापि महिलाओं और बच्चों से संबंधित कई ऐसी समस्याएं हैं जो बोर्ड की मौजूदा योजनाओं और कार्यक्रमों के दायरे में नहीं आतीं। विभिनन क्षेत्रों में कार्यरत स्वैच्छिक संगठन ऐसी समस्याएं लेकर आएं जिनके लिए विशेष रूप से ध्यान दिए जाने और विशेष प्रयास किए जाने की जरूरत है। केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड ने महिलाओं और बच्चों के ऐसे समूहों को सहायता प्रदान करने के उद्‌देश्य से अभियन योजना कार्यक्रम प्रारंभ किया है।

योजना

इस योजना के अंतर्गत संस्था से यह अपेक्षा की जाती है कि वह परियोजना तैयार करे तथा संबंधित क्षेत्र, प्रस्तावित परियोजना की आवश्यकताओं, ध्यान दिए जाने वाले क्षेत्रों, कार्यप्रणाली, उपकरणों, बजट आदि का विवरण दे।

अभिनव योजना के अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों/स्वैच्छिक संगठनों की पात्रता अन्य योजनाओं जैसी ही है। इस योजना के लिए कोई निर्धारित बजट नहीं है। गैर-सरकारी संगठन/स्वैच्छिक संगठन पांच वर्षों तक अपना प्रस्ताव भेज सकते हैं, जिसमें संगठन द्वारा आयोजित की जाने वाली गतिविधियों से संबंधित आवश्यक कार्य और बजट को दर्शाया गया हो।

•      परियोजना प्रस्ताव का प्रारूप निम्नलिखित दिशा-निर्देशों के अनुसार होना चाहिए -

•      जनता एवं क्षेत्र-विशेष की जरूरतों के आधार पर क्षेत्र एवं गतिविधि की पहचान करना। क्षेत्र के विकास का दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। सामाजिक बुराइयों या मुद्‌दों पर अधिक से अधिक प्रभाव डालने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

•       आवश्यकता और औचित्य, जिसके लिए मूलभूत आंकड़े दिए जाएं।

•      लक्ष्य : उस समूह की पहचान, जिसके लिए गतिविधि चलाने का प्रस्ताव है, साथ ही क्षेत्र में लाभार्थियों की संख्या का पता लगाना।

•     विधि : प्रस्तावित गतिविधि  चलाने के लिए विस्तृत योजना भेजी जाए। लक्षित विशेष मुद्‌दों और जनसमूह के अतिरिक्त, पहचाने गए क्षेत्र के संपूर्ण विकास पर बल दिया जाए। जहां अधिकतम प्रभाव के लिए विभिन्न योजनाओं का कन्वर्जेस किया जा सकता हो, वहां मदर एन.जी.ओ. की पहचान कर जन समूह आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए। यदि ऐसा कोई संगठन न हो, वहां राज्य बोर्ड एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करे और अन्य छोटे गैर-सरकारी संगठन इस मदर एन.जी.ओ. के साथ काम करें। कार्यक्रम के सफल होने पर इसे अन्य क्षेत्रों में भी चलाया जाए।

•          अवधि : गतिविधि की अवधि को चरणबद्ध रूप से दर्शाया जाए। यदि यह दीर्घकालिक गतिविधि का प्रस्ताव है तो इसे लगातार प्रभावी रूप से चलाने पर बल दिया जाए। यदि यह अल्पकालिक हो तो प्रस्ताव बनाते समय इसके अधिकतम प्रभाव को सुनिश्चित किया जाए।

बजट : परियोजना की प्रस्तावित अवधि के अनुसार आवर्ती और अनावर्ती व्यय को दर्शाते हुए विस्तृत बजट प्रस्तुत किया जाए। बजट को चरणबद्ध रूप से बनाया जाए और इसे प्रस्ताव के साथ भेजा जाए।

 

ध्यान देने वाले क्षेत्र :

 

•          केंद्र और राज्य की योजनाओं के कन्वर्जेंस के लिए सहायक सेवाएं।

•          महिलाओं और बच्चों के उपेक्षित और कमजोर समूहों के लिए उनकी विशेष जरूरतों के अनुसार सेवाएं प्रदान करना।

पुनर्वास केंद्रों द्वारा अधिकतम प्रभाव के लिए बोर्ड की योजनाओं का लाभ दिया जाना।

 

स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित उन परियोजनाओं के लिए कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा जो संबंधित मंत्रालयों के अंतर्गत आती है। लक्षित समूह में महिलाएं एवं बच्चों, वरिष्ठ नागरिक, किशोरियां, अपंग महिलाएं व बच्चे, मानव-जनित और प्राकृतिक आपदाओं एवं समाजिक बुराइयों से पीड़ित लोग शामिल किए जाएं।

राज्य बोर्ड के समर्थन और सिफारिशों के साथ सभी आवश्यक जानकारियों सहित भेजे गए प्रस्तावों को ही मंजूरी दी जाएगी। दूसरी योजनाओं  की तरह इसमें भी अनुदान का बंटन किस्तों में किया जाएगा। मंजूरी पत्र के नियम व शर्तों की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही अनुदान की पहली किस्त बंटित की जाएगी। आगे की किस्तों का बंटन रिपोर्ट, संतोषप्रद कार्य-निष्पादन और पूर्व के बंटन के लेखों के निपटान के बाद ही किया जाएगा।

 

लक्ष्यः- उस समूह की पहचान, जिसके लिए गतिविधि चलाने का प्रस्ताव है, साथ ही क्षेत्र में लाभार्थियों की संख्या का पता लगाना।

विधिः- प्रस्तावित गतिविधि चलाने के लिए विस्तृत योजना भेजी जाए। लक्षित विशेष  मुद्‌दों और जनसमूह के अतिरिक्त, पहचाने गए क्षेत्र के संपूर्ण विकास पर बल दिया जाए। जहां अधिकतम प्रभाव के लिए विभिन्न योजनाओं का कन्वर्जेंस किया जा सकता हो, वहां मदर एन.जी.ओ. की पहचान कर जन समूह आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए। यदि ऐसा कोई संगठन न हो, वहां राज्य बोर्ड एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करे और अन्य छोटे गैर-सरकारी संगठन इस मदर एन.जी.ओ के साथ काम करें। कार्यक्रम के सफल होने पर इसे अन्य क्षेत्रों में भी चलाया जाए।

अवधिः- गतिविधि की अवधि को चरणबद्‌ध रूप से देखा जाए। यदि यह दीर्घकालिक गतिविधि का प्रस्ताव है तो इसे लगातार प्रभावी रूप से चलाने पर बल दिया जाए। यदि यह अल्पकालिक हो तो प्रस्ताव बनाते समय इसके अधिकतम प्रभाव को सुनिश्चित  किया जाए।

बजटः- परियोजना की प्रस्तावित अवधि के अनुसार आवर्ती और अनावर्ती व्यय को देखते  हुए विस्तृत बजट प्रस्तुत किया जाए। बजट को चरणबद्‌ध रूप से बनाया जाए और इसे प्रस्ताव के साथ भेजा जाए।

 

ध्यान देने वाले क्षेत्र :

 

1. परामर्श संबंधी सेवाएं

2. व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से हुनर विकास

3. महिलाओं और किशोरियों से संबधित विभिन्न मुद्‌दों पर जागरूकता/सशक्तिकरण शिविर

4. स्वास्थ्य सेवाएं

5. कानूनी सहायता संबंधी सेवाएं

6. उन बालिकाओं/महिलाओं के लिए शैक्षणिक पाठ्‌यक्रम, जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है

7. प्राकृतिक और मानव-जनित आपदाओं से पीड़ित लोगों के लिए राहत गतिविधियां

8. आपदा प्रबंधन

स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित उन परियोजनाओं के लिए कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा जो संबंधित मंत्रालयों के अंतर्गत आती हैं। लक्षित समूह में महिलाएं एवं बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, किशोरियां, अपंग महिलाएं व बच्चे, मानव-जनित और प्राकृतिक आपदाओं एवं समाजिक बुराइयों से पीड़ित लोग शामिल किए जाएं।

राज्य बोर्ड के समर्थन और सिफारिशों के साथ सभी आवश्यक जानकारियों सहित भेजे गए प्रस्तावों को ही मंजूरी दी जाएगी। दूसरी योजनाओं की तरह इसमें भी अनुदान का बंटन किस्तों में किया जाएगा। मंजूरी पत्र के नियम व शर्तों की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही अनुदान की पहली किस्त बंटित की जाएगी। आगे की किस्तों का बंटन रिपोर्ट, संतोषप्रद कार्य-निष्पादन और पूर्व के बंटन के लेखों के निपटान के बाद ही किया जाएगा।

स्रोत: समाज कल्याण विभाग, केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड|